Wednesday, 20 August 2014

ऐसा भारत देश हे मेरा..ऐसा भारत देश हे मेरा..


चाहे कितने हैं भेस ..पर एक है हमारा देश..
कश्मीर से कन्याकुमारी..एक है जिंद एक जान हमारी..
गुजरात से अरुणाचल हमारी भारत मा का आंचल..
तीन ओर जाल की तरंग ओर माथे मुकूट हिमालया पर्बत..गले सजी गंगा मैया जलज जिसका शरबत..
उत्तर में भाँगड़ा दक्षिण कथकली..कोल्कत्ता में hawrah और दिल्ली में paranthey वाली गल्ली ..
दिल्ली धड़कन है दिल की..तो उत्तर प्रदेश नवज़ इसकी..
लाजवाब है राजस्थान का दाल बाती चूरमा..और जन्नत हैं पंजाब के चावल राजमाह..
एक देश और हजारों रंग..जहाँ रेह्ते सब संग संग..
भारत माँ के गान गाते..सब को शांति अहिंसा का पाठ पड़ाते..
साबरमती का है आश्रय जो..हमारा प्यारा भारत वो..
कहीं ढोल तो कहीं नगाड़ा..नाचता हमारा भारत सारा.
जहाँ रही थी माँ टरेसा..जहाँ जन्मे थे महात्मा गाँधी..
जहाँ वीर भगत सिंह जैसे..हम भारत वासी ऐसे..
ऐसा भारत देश हमारा..ऐसा भारत देश हमारा..
जहाँ शहीदों कि चीताहो पर लगते हर बरस मेले..जहाँ ध्यान चंद, तेंडुलकर जैसे खेले..
जिसको केह्ते सब चिड़या सोने की..जहाँ प्रथा है बज़ुर्गों का आदर संजोने की..
ऐसा भारत देश हे मेरा..ऐसा भारत देश हे मेरा..

-गगन काँसल
पटियाला